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श्रीमद्भगवद्गीता
📚..ज्ञान, योग और मोक्ष का दिव्य मार्ग..📚

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग

🔸 श्लोक 1 (संस्कृत श्लोक):

धृतराष्ट्र उवाच:
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः |
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥

🔹 हिंदी में अर्थ:

धृतराष्ट्र बोले: हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्र होकर, युद्ध की इच्छा रखने वाले मेरे और पांडु के पुत्रों ने क्या किया?

🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):

इस श्लोक में अंधे राजा धृतराष्ट्र युद्धभूमि में उपस्थित नहीं होने के कारण अपने मंत्री संजय से पूछते हैं कि जब कुरुक्षेत्र में दोनों पक्ष युद्ध के लिए तैयार हुए, तो उन्होंने क्या किया। "धर्मक्षेत्र" शब्द यह दर्शाता है कि यह केवल भौतिक युद्ध नहीं है, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच आत्मिक संघर्ष भी है।

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