📖 श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय
🕉️ गीता हमें क्यों पढ़नी चाहिए? – श्रीमद्भगवद्गीता का उद्देश्य
🌼 श्रीमद्भगवद्गीता: जीवन का दिव्य मार्गदर्शक
श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह ग्रंथ उन प्रश्नों का उत्तर देता है जिनसे हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी जूझता है – "मैं कौन हूँ?", "मेरा कर्तव्य क्या है?", "सही क्या है?", "गलत क्या है?"।
📚 हमें गीता क्यों पढ़नी चाहिए?
- 👉 गीता हमें जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन सिखाती है – चाहे वह कर्म हो, भक्ति हो या ज्ञान।
- 👉 यह मन की शांति, आत्मबोध और निर्णय लेने की शक्ति देती है।
- 👉 कठिन परिस्थितियों में धैर्य और दृष्टिकोण बनाए रखना सिखाती है।
- 👉 यह हमें निराशा से आशा की ओर ले जाती है।
🎯 श्रीमद्भगवद्गीता का उद्देश्य क्या है?
श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अर्जुन को जो उपदेश दिए, वे केवल उस समय के लिए नहीं थे, बल्कि आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। गीता का उद्देश्य है:
- ✨ मनुष्य को अपने कर्तव्य का बोध कराना।
- ✨ निष्काम कर्म के महत्व को समझाना – कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
- ✨ अध्यात्मिक जागरूकता और आत्मा की अमरता का ज्ञान देना।
- ✨ मोह, संदेह, और भ्रम से मुक्त करना।
- ✨ मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाना।
🌟 गीता हर व्यक्ति के लिए क्यों उपयोगी है?
चाहे आप छात्र हों, गृहस्थ, कर्मचारी या संन्यासी – गीता हर किसी को जीवन की दिशा देती है। यह एक ऐसा दिव्य मार्गदर्शन है जिसे अपनाकर मनुष्य धर्म, कर्म और ज्ञान के संगम से अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।
🙏 एक श्लोक जो जीवन बदल सकता है:
“योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥”
👉 अर्थ: हे अर्जुन! योग में स्थित होकर, आसक्ति को त्याग कर, सफलता और असफलता में समान रहकर कर्म करो – यही समत्व बुद्धि को योग कहा गया है।
🕉️ निष्कर्ष:
श्रीमद्भगवद्गीता एक जीवित ज्ञान है। यह हमें सिखाती है कि जीवन एक युद्ध है, जिसमें हमें विवेक, साहस और श्रद्धा से लड़ना होता है। इसे पढ़ना न केवल आत्मा को शुद्ध करता है, बल्कि जीवन को भी सार्थक बनाता है।
© Bipin Kumar Chaurasiya द्वारा निर्मित | यह सामग्री सार्वजनिक उपयोग हेतु है – धर्म प्रचार में निःसंकोच उपयोग करें।
