📘 श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में
श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय सनातन संस्कृति का एक अनुपम और दिव्य ग्रंथ है, जो महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है। इसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र में उपदेश रूप में दिया था। यह ग्रंथ केवल धर्म युद्ध की बात नहीं करता, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के जीवन का मार्गदर्शन करता है।
🕉️ मूल उद्देश्य:
जब अर्जुन युद्ध के मैदान में मोह और शोक से ग्रसित हो गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्म, ज्ञान, भक्ति और योग का उपदेश दिया — यही उपदेश श्रीमद्भगवद्गीता है।
📜 रचना:
इस ग्रंथ में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। प्रत्येक अध्याय विभिन्न योगों और जीवन के मार्गों की व्याख्या करता है — जैसे कर्म योग, भक्ति योग, ज्ञान योग आदि।
🌟 महत्व:
गीता न केवल धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह जीवन की समस्याओं से उबरने का अद्भुत समाधान भी देती है। इसका अध्ययन मन को शांति, आत्मा को ज्ञान और जीवन को दिशा प्रदान करता है।
🙏 निष्कर्ष:
श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा दिव्य प्रकाश है जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है। यह ग्रंथ हर मनुष्य को जीवन के हर क्षेत्र में सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।