📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
📝 श्लोक 30 – शीर्षक: अर्जुन का युद्ध से पीछे हटने की भावना
🔸 संस्कृत श्लोक:
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः |
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
हे केशव! मैं खड़ा नहीं रह पा रहा, मेरा मन चक्कर खा रहा है,
और मैं केवल अपशकुन ही देख रहा हूँ।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
अर्जुन की स्थिति अत्यंत कमजोर हो गई है।
उसका शरीर काँप रहा है, मन भ्रमित हो गया है,
और वह हर ओर से अशुभ संकेतों को महसूस कर रहा है।
वह युद्ध से हटने की ओर झुक रहा है।
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