📖 श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय
अध्याय 1
अध्याय 2
अध्याय 3
अध्याय 4
अध्याय 5
अध्याय 6
अध्याय 7
अध्याय 8
अध्याय 9
अध्याय 10
अध्याय 11
अध्याय 12
अध्याय 13
अध्याय 14
अध्याय 15
अध्याय 16
अध्याय 17
अध्याय 18
📘 श्रीमद्भगवद्गीता – संपूर्ण परिचय
🔹 श्रीमद्भगवद्गीता क्या है?
श्रीमद्भगवद्गीता हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र ग्रंथ है, जो महाभारत के भीष्म पर्व में सम्मिलित है। यह भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को युद्धभूमि में दिए गए दिव्य उपदेशों का संग्रह है। इसमें जीवन, धर्म, कर्म, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों का वर्णन है।
🔸 कुल अध्याय (Adhyaya): 18
🔸 कुल श्लोक (Shlok): 700
📝 प्रत्येक अध्याय में श्लोकों की संख्या:
- 1. अर्जुन विषाद योग – 47 श्लोक
- 2. सांख्य योग – 72 श्लोक
- 3. कर्म योग – 43 श्लोक
- 4. ज्ञान कर्म संन्यास योग – 42 श्लोक
- 5. कर्म संन्यास योग – 29 श्लोक
- 6. ध्यान योग – 47 श्लोक
- 7. ज्ञान विज्ञान योग – 30 श्लोक
- 8. अक्षर ब्रह्म योग – 28 श्लोक
- 9. राजविद्या राजगुह्य योग – 34 श्लोक
- 10. विभूति योग – 42 श्लोक
- 11. विश्वरूप दर्शन योग – 55 श्लोक
- 12. भक्ति योग – 20 श्लोक
- 13. क्षेत्र क्षेत्रज्ञ योग – 35 श्लोक
- 14. गुणत्रय विभाग योग – 27 श्लोक
- 15. पुरुषोत्तम योग – 20 श्लोक
- 16. दैवासुर संपद विभाग योग – 24 श्लोक
- 17. श्रद्धात्रय विभाग योग – 28 श्लोक
- 18. मोक्ष संन्यास योग – 78 श्लोक
🔆 श्रीमद्भगवद्गीता का मुख्य उद्देश्य:
गीता का उद्देश्य है – जीवन के हर मोड़ पर हमें धर्म, न्याय, कर्तव्य और आत्मबोध के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना। यह एक ऐसा ग्रंथ है जो हमें न केवल अध्यात्म का ज्ञान देता है, बल्कि हमारे जीवन को भी दिशा देता है।
🌸 श्रीकृष्ण का उपदेश:
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।" – अर्थात्: केवल कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता मत करो।