📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
🔸 श्लोक 1 (संस्कृत श्लोक):
सञ्जय उवाच:
तं तथा कृपयाविष्टम् अश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् |
विषीदन्तम् इदं वाक्यम् उवाच मधुसूदनः ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
संजय बोले: उस समय जब अर्जुन करुणा से व्याकुल हो गया,
उसकी आँखें आँसुओं से भर गईं, और उसका मन अत्यंत उदास था —
तब मधुसूदन (भगवान श्रीकृष्ण) ने उससे यह वचन कहा।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
यह श्लोक बताता है कि अर्जुन का मन युद्ध की स्थिति देखकर द्रवित हो गया था। वह अपने स्वजनों को देखकर मोह और करुणा में पड़ गया। उसकी आँखों में आँसू थे और वह गहरे दुःख में था। तभी भगवान श्रीकृष्ण उसे सही मार्ग दिखाने के लिए बोलना आरंभ करते हैं।
