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श्रीमद्भगवद्गीता
📚..ज्ञान, योग और मोक्ष का दिव्य मार्ग..📚

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग

🔸 श्लोक 2 (संस्कृत श्लोक):

श्रीभगवानुवाच:
कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् |
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन ॥

🔹 हिंदी में अर्थ:

भगवान श्रीकृष्ण बोले:
हे अर्जुन! यह मोह तुझ पर इस कठिन समय में कैसे छा गया?
यह न तो आर्य पुरुषों को शोभा देता है, न स्वर्ग दिलाने वाला है,
और न ही यश की प्राप्ति कराने वाला है।

🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):

श्रीकृष्ण अर्जुन को झकझोरते हुए पूछते हैं कि यह दुर्बलता और मोह की भावना युद्ध जैसे धर्म के क्षण में क्यों आई? यह जो तू करुणा के कारण युद्ध से भागना चाहता है, वह आचरण आर्य पुरुषों (श्रेष्ठ जनों) का नहीं होता। यह न तो पुण्य है, न सम्मानजनक। बल्कि यह तुझे अपकीर्ति और अधर्म की ओर ले जाएगा।

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