Facebook

🕉️
श्रीमद्भगवद्गीता
📚..ज्ञान, योग और मोक्ष का दिव्य मार्ग..📚

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग

📝 श्लोक 10 – शीर्षक: पांडवों की सेना से तुलना करते हुए कौरव सेना का गौरव

🔸 संस्कृत श्लोक:

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् |
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ॥

🔹 हिंदी में अर्थ:

हमारी सेना, जिसकी रक्षा भीष्म कर रहे हैं, असीमित है, और उनकी सेना, जिसकी रक्षा भीम कर रहे हैं, सीमित प्रतीत होती है।

🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):

दुर्योधन अपनी सेना की शक्ति का गर्वपूर्वक वर्णन करता है। वह कहता है कि हमारी सेना की रक्षा स्वयं भीष्म जैसे महायोद्धा कर रहे हैं, जिससे यह असीम बलशाली है। जबकि पांडवों की सेना की रक्षा केवल भीम कर रहे हैं, जो सीमित शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह तुलना दुर्योधन के मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास को दर्शाती है।

WhatsApp Facebook Instagram