📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
📝 श्लोक 13 – शीर्षक: कौरव सेना में शंख, नगाड़े, भेरी और आनक का नाद
🔸 संस्कृत श्लोक:
ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः |
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
इसके बाद शंख, भेरी, नगाड़े, आनक और गोमुख — ये सभी एक साथ जोर-जोर से बजने लगे, जिससे अत्यंत भयानक शब्द हुआ।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
इस श्लोक में कौरव पक्ष की सेना में उठे युद्धघोष का वर्णन किया गया है। शंख, भेरी, ढोल, नगाड़े, गोमुख आदि सभी वाद्य एक साथ बज उठे। यह सब युद्ध की तैयारी और उत्साह का प्रतीक था। इससे सम्पूर्ण युद्धभूमि भय और गर्जना से भर गया।