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श्रीमद्भगवद्गीता
📚..ज्ञान, योग और मोक्ष का दिव्य मार्ग..📚

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग

📝 श्लोक 14 – शीर्षक: पांडवों के शंखनाद द्वारा वीरता का उद्घोष

🔸 संस्कृत श्लोक:

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ |
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥

🔹 हिंदी में अर्थ:

फिर, सफेद घोड़ों से जुते हुए एक भव्य रथ में स्थित
माधव (भगवान श्रीकृष्ण) और पाण्डव (अर्जुन) ने
अपने-अपने दिव्य शंखों को बजाया।


🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):

यह दृश्य युद्ध भूमि का है। भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन एक दिव्य रथ पर खड़े हैं, जिसे श्वेत (सफेद) घोड़े खींच रहे हैं — यह शुद्धता और विजय का प्रतीक है। युद्ध की गंभीरता को दर्शाते हुए, दोनों ने अपने अलौकिक शंख बजाए।

शंखनाद केवल युद्ध की शुरुआत नहीं था, बल्कि यह धर्म की घोषणा थी। यह संकेत था कि अब न्याय के लिए, धर्म की रक्षा के लिए युद्ध आरंभ होगा। श्रीकृष्ण स्वयं सारथी हैं — जो दर्शाता है कि जब मनुष्य धर्म के मार्ग पर चलता है, तो ईश्वर स्वयं उसका मार्गदर्शन करते हैं। 

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