Facebook

🕉️
श्रीमद्भगवद्गीता
📚..ज्ञान, योग और मोक्ष का दिव्य मार्ग..📚

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग

📝 श्लोक 3 – शीर्षक: दुर्योधन द्वारा पांडवों की सेना की विशेषताओं का वर्णन

🔸 संस्कृत श्लोक:

पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् |
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥

🔹 हिंदी में अर्थ:

हे आचार्य! देखिए, पांडुपुत्रों की यह विशाल सेना, जो आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा सुव्यवस्थित रूप से सजाई गई है।

🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):

दुर्योधन, गुरु द्रोणाचार्य से कहता है कि पांडवों की सेना बहुत विशाल है और इसे आपके ही शिष्य धृष्टद्युम्न ने व्यवस्थित किया है। यह बात वह उन्हें ताना मारते हुए कहता है, यह संकेत देने के लिए कि आपने जिसे शस्त्र विद्या सिखाई, वह आज हमारे विरुद्ध युद्ध कर रहा है।

WhatsApp Facebook Instagram