📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
📝 श्लोक 4 – शीर्षक: पांडवों की सेना के प्रमुख योद्धाओं का उल्लेख
🔸 संस्कृत श्लोक:
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि |
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
इस सेना में अनेक महान धनुर्धारी और शूरवीर हैं, जो युद्ध में भीम और अर्जुन के समान बलशाली हैं— जैसे युयुधान, विराट और महारथी द्रुपद।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
दुर्योधन पांडवों की सेना में उपस्थित पराक्रमी योद्धाओं की प्रशंसा करता है। वह कहता है कि वहाँ भीम और अर्जुन जैसे महान योद्धाओं के समकक्ष युयुधान (सात्यकि), विराट और राजा द्रुपद जैसे महारथी भी हैं। इससे उसकी चिंता और सावधानी झलकती है।
