📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
🔸 श्लोक 6 (संस्कृत श्लोक):
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च |
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
जिनके लिए हम राज्य, भोग और सुख की इच्छा करते हैं, वे ही लोग यहाँ युद्धभूमि में अपने प्राण और धन त्यागने के लिए तैयार खड़े हैं।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
अर्जुन कहता है कि युद्ध का उद्देश्य राज्य और सुख है — लेकिन जिन लोगों के साथ वह ये सुख बांटना चाहता था, वे ही आज युद्धभूमि में उसके विरोध में खड़े हैं। ऐसे में यह युद्ध व्यर्थ और दुखद प्रतीत होता है। यह अर्जुन के मानसिक द्वंद्व को दर्शाता है।