📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
📝 श्लोक 8 – शीर्षक: कौरवों की ओर से महान योद्धाओं का वर्णन – भीष्म, कर्ण, कृपाचार्य
🔸 संस्कृत श्लोक:
भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः |
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
(आप) स्वयं, भीष्म, कर्ण और समर में विजयी कृपाचार्य; अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र — ये सभी प्रमुख योद्धा हैं।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
दुर्योधन कौरव पक्ष की सेना के अद्वितीय योद्धाओं की सूची गिनाता है। वह गुरु द्रोण को भी इस सूची में सम्मिलित करता है, जो उसके लिए सम्मान और अपनी सेना के बल को दर्शाता है। यह श्लोक दर्शाता है कि कौरव पक्ष में भी परम शक्तिशाली योद्धा हैं जो युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।