📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
📝 श्लोक 15 – शीर्षक: पांडवों द्वारा दिव्य शंखनाद
🔸 संस्कृत श्लोक:
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः |
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
हृषीकेश (श्रीकृष्ण) ने ‘पाञ्चजन्य’ नामक शंख, धनंजय (अर्जुन) ने ‘देवदत्त’ नामक शंख, और भीमसेन ने ‘पौण्ड्र’ नामक विशाल शंख बजाया।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
इस श्लोक में पांडव पक्ष के प्रमुख योद्धाओं द्वारा अपने-अपने शंख बजाने का वर्णन है। श्रीकृष्ण, जो रथ के सारथी हैं, ‘पाञ्चजन्य’ शंख बजाते हैं। अर्जुन, जो धनुर्विद्या में निपुण हैं, ‘देवदत्त’ शंख बजाते हैं। और बलवान भीम, जिन्हें ‘वृकोदर’ कहा गया है, ‘पौण्ड्र’ नामक महाशंख बजाते हैं। यह शंखनाद पांडवों की वीरता और आत्मबल का प्रतीक है।