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श्रीमद्भगवद्गीता
📚..ज्ञान, योग और मोक्ष का दिव्य मार्ग..📚

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग

🔸 श्लोक 3 (संस्कृत श्लोक):

तं तथा कृपयाविष्टम् अश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् |
विषीदन्तम् इदं वाक्यम् उवाच मधुसूदनः ॥

🔹 हिंदी में अर्थ:

उस समय जब अर्जुन करुणा से व्याकुल हो गया,
उसकी आँखें आँसुओं से भर गईं और उसका मन अत्यंत दुःखी हो गया,
तब मधुसूदन (भगवान श्रीकृष्ण) ने उससे यह वचन कहा।

🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):

यह श्लोक बताता है कि अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर करुणा से भर गया था।
उसके मन में युद्ध करने की इच्छा समाप्त हो गई थी।
वह विषाद में डूबा हुआ था और उसे मार्गदर्शन की आवश्यकता थी।
तब श्रीकृष्ण ने उसे धर्म का ज्ञान देना प्रारंभ किया।

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