📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
🔸 श्लोक 4 (संस्कृत श्लोक):
अपश्यतं तदा पार्थः पितृ़नथ पितामहान् |
आचार्यान्मातुलान्भ्रातृ़न्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ||
श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
तब अर्जुन ने दोनों सेनाओं में खड़े हुए अपने पिता, पितामह, आचार्य, मामा, भाई, पुत्र, पौत्र, मित्र, श्वसुर और शुभचिंतकों को देखा।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
इस श्लोक में वर्णन है कि अर्जुन ने जब युद्धभूमि में अपने सगे-संबंधियों और मित्रों को दोनों पक्षों की सेनाओं में देखा, तो वह मानसिक रूप से विचलित हो गया। वह युद्ध से पहले भावुक हो उठा क्योंकि जिन्हें वह अपना समझता था, वे सब सामने युद्ध के लिए तैयार खड़े थे।