📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग
📝 श्लोक 5 – शीर्षक: अन्य महारथियों का परिचय — पांडव पक्ष के महान योद्धा
🔸 संस्कृत श्लोक:
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् |
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ॥
🔹 हिंदी में अर्थ:
इस सेना में धृष्टकेतु, चेकितान, पराक्रमी काशी नरेश, पुरुजित, कुन्तिभोज और श्रेष्ठ पुरुष शैब्य भी विद्यमान हैं।
🪔 भावार्थ (सरल व्याख्या):
दुर्योधन पांडव पक्ष की विशाल और पराक्रमी सेना का वर्णन करते हुए उन प्रमुख राजाओं और योद्धाओं के नाम लेता है जो पांडवों की ओर से युद्ध में भाग ले रहे हैं। इससे उसकी मानसिक स्थिति में उद्वेग और रणनीतिक चिंता की झलक मिलती है।